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परामर्श प्रक्रिया क्या है?

परामर्श प्रक्रिया क्या है?

counselling process

परामर्श प्रक्रिया क्या है? - What is the counselling process?

Counselling एक ऐसी process है जिसके माध्यम से professional counsellor अपने क्लाइंट (counselee) के मनोवैज्ञानिक (psychological), सामाजिक (social) और personal problem को दूर करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Counselling process मैं कई phase शामिल है जो कि एक-दूसरे Nursing process की ही तरह इंटररिलेटेड और इंटरकनेक्टेड होती है। लेकिन ये process एक rigid entity नही है, यह flexible है और problem के आधार पर परिवर्तित भी हो सकती है।
Counselling process की सामान्यतः 5 phase है...

PHASE 1: Establishing Relationship

  • यह पहला और मुख्य चरण (phase) है।
  • इसे foundation of the counselling process भी माना जाता है।
  • Counsellor और counselee एक-दूसरे को introduce करते है।
  • दोनो (counsellor & counselee) अच्छा तालमेल (good rapport) स्थापित करते है।
  • दोनो के बीच अच्छा तालमेल होने से respect, trust और psychological comfort पैदा होता है।
Counsellor द्वारा effective relationship को maintain करने के लिए निम्नलिखित बातो का ध्यान रखना होता है...
  • खुद को introduce करना।
  • हमेशा अपने client (counselee) को उसके नाम से संबोधित करना तथा उसका नाम याद रखना।
  • जब counselee बोल रहा हो तो उसकी बात में interrupt नही करना तथा उसे ध्यान से सुनना।
  • Counselee के nonverbal communication को observe करना।

PHASE 2: Assessment

  • Data collection phase
  • Counsellor, problems से संबंधित जानकारी पता करने के लिये counselee को motivate करता है।
  • Information collect करने के बाद counselee की problem से related diagnosis तैयार किया जाता है।
  • Diagnosis की मदद से भविष्य में किसी patient में उत्पन्न होने वाली समस्याओं  के कारणों का पता लगाने में मदद मिलती है।

PHASE 3: Setting Goals

  • Collected data से problem का पता करना।
  • इस चरण में counsellor और counselee दोनो द्वारा goal को मिलकर निर्धारित किया जाता है।

PHASE 4: Intervention

  • इसे operational phase भी कहते है।
  • इस चरण में counsellor और counselee मिलकर समस्या का समाधान करते है।
  • Counsellor को सबसे पहले अपने client से पहले कभी किये गये solution के बारे में पूछा जाना चाहिए जो उस समय असफल था। इससे counsellor को उस समस्या से संबंधित दूसरे समाधानों (alternatives) को तैयार करने में आसानी होती है।
  • Apply किये गये intervention के काम ना करने की स्थिति में counsellor हमेशा alternative intervention तैयार रखता है।

PHASE 5: Termination & Follow-up

  • Final stage of the counselling process
  • इस चरण में counselee अपनी समस्याओं को खुद handle करने लग जाता है।
  • Follow-up का उद्देश्य counselee की problems का समाधान होने या ना होने की स्थिति का पता लगाना है।
  • इसका उद्देश्य client की problem solve ना होने पर दूसरी प्रकार की counselling की आवश्यकता का पता करना है।
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