Menu

Bone Fracture: Definition,Types,Risk Factors and More (in hindi)

Bone Fracture: Definition,Types,Risk Factors and More (in hindi)

FRACTURE

What is the bone fracture? in hindi

  • Bone fracture एक चिकित्सा स्थिति(medical condition) है जिसमें bone की निरंतरता(continuity) में आंशिक या पूर्ण रूप से विभाजित(break) हो जाता है। अधिक गंभीर मामलों में bone कई टुकड़ों में टूट सकती है। 
  • Bone fracture, हड्डी पर अत्यधिक बल का प्रभाव या तनाव(tension) का परिणाम हो सकता है।
  • कुछ स्थितियो में bone के कमजोर होने के कारण, कम तीव्रता(speed) की चोट से भी bone टूट सकती है। जैसे- osteoporosis , bone cancer, osteopenia या osteogenesis imperfecta के केस में हड्डी में हल्की चोट भी fracture का कारण बन सकती है।

# DEFINITION OF BONE FRACTURE

Bone की निरंतरता(continuity) का भंग(break) होना।

# RISK FACTORS OF BONE FRACTURE

निम्न खतरों के कारण bone में fracture हो सकता है:

1. TRAUMA(चोट):

  • Sudden falling (अचानक गिरना)
  • twisting injuries (मौच आना)
  • sports injuries (खेलकूद के दौरान चोट आना)
    BONE FRACTURE
  • Shearing force (इसे आप एक उदाहरण से समझ सकते है, आप एक पैन के दोनों सिरों को अपने दोनों हाथों से मजबूती से पकड़े, अब इसी स्थिति में अपने हाथों को अपने opposite हाथ की कोहनी तक ले जाने का प्रयास करे: आप को अनुभव हो रहा होगा कि पैन के दोनों सिरों पर opposite direction में एक force लग रहा है)
  • Compression force (दबाव)
  • Tension force (तनाव)

2. MEDICAL/PATHOLOGICAL CONDITION (चिकित्सीय/रोग सम्बन्धित अवस्था):

  • Osteoporosis
  • infections (bone में किसी प्रकार का संक्रमण)
  • osteogenesis imperfecta (incomplete bone formation)
  • tumors in bones (bone कैंसर)


# TYPE OF BONE FRACTURE

1. Open & close fracture

    BONE FRACTURE
  • Open fracture: इसे compound fracture भी कहते है। इस प्रकार के फ्रैक्चर में bone टूटकर skin से बाहर आ जाती है और skin के उस स्थान पर open wound(खुला घाव) बन जाता है।
  • Close fracture: इस प्रकार के फ्रैक्चर के bone टूटती है लेकिन स्किन पर किसी भी प्रकार का wound(घाव) नही बनता है।

2. Stable & unstable fracture

  • Stable fracture: इस प्रकार के फ्रैक्चर में bone crack होने के बाद भी अपनी यथावत स्थिति में रहती है। फ्रैक्चर के बाद bone को realign करने की आवश्यकता नही होती है। eg.- transverse, spiral, greenstick
  • Unstable fracture: इस प्रकार के फ्रैक्चर में bone crack होने के बाद अपनी जगह से displace हो जाती है। eg.- communited fracture, displaced fracture


3. According to structure of bone fracture


BONE FRACTURE

  • Longitudinal fracture: इस प्रकार के फ्रैक्चर में हड्डी के लंबवत अक्ष(longitudinal axis) पर दरार (क्रैक) आ जाती है, जिससे हड्डी दो भागों में बंट बाती है।
  • Transverse fracture: इसमें हड्डी के अनुप्रस्थ अक्ष (transverse axis) पर दरार (क्रैक) आ जाती है।
  • Oblique fracture: इस प्रकार के फ्रैक्चर में हड्डी पर तिरछी(oblique) दरार आती है।
  • Spiral fracture: इस प्रकार के फ्रैक्चर में हड्डी पर घुमावदार रूप (spiral shape) में दरार आती है। ऐसा तब होता है जब किसी वस्तु या मशीन आदि के प्रभाव के कारण  हड्डी में घुमाव आ जाता है।
  • Displaced (overriding) fracture: इसमें हड्डी दो भागों में टूटकर अपनी स्थिति से हट जाती है और हड्डी का एक भाग दूसरे भाग के ऊपर आ जाता है।
  • Comminuted fracture: इसमें हड्डी तीन या इससे अधिक भागो में टूट जाती है
  • Greenstick fracture: इस प्रकार का फ्रैक्चर आमतौर पर छोटे बच्चो में देखने को मिलता है। इसमें हड्डी पर किसी प्रकार का दबाव पड़ने से हड्डी एक तरफ से मुड़ जाती है और उसके कारण दूसरी तरफ से टूट जाती है। लेकिन हड्डी कभी भी दो भागों में नही बटती है।

4. Other type of fracture

  • Pathological fracture: इस स्थिति में हड्डी में किसी प्रकार की pathological problem (जैसे- osteoporosis, bone cancer, etc.) के कारण हड्डी अंदर से कमजोर हो जाती है जिससे हड्डी पर अचानक दबाव आने से में फ्रैक्चर हो जाता है।
  • Impacted fracture: इसमें फ्रैक्चर होने पर हड्डी का एक भाग दूसरे भाग में धंस जाता है।
  • Stress fracture: यह तब होता है जब हड्डी पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ता है।
  • Avulsion fracture: इस प्रकार का फ्रैक्चर तब होता है जब हड्डी से जुड़ने वाले ligaments और tendon में खिंचाव आने के कारण हड्डी का छोटा सा भाग हड्डी से अलग हो जाता है। 
यह भी पढ़े: Psoriasis (सोरायसिस) हिंदी


# PATHOPHYSIOLOGY OF THE FRACTURE

किसी भी रिस्क फैक्टर के कारण (Due to the risk factors)
हड्डी में दरार आना (disruption in continuity of bone)
हड्डी से जुड़ी muscles और blood vessels में क्षति होना
साथ ही हड्डी के आसपास के soft tissue में क्षति (damage) होना
रक्त स्त्राव (bleeding) होना
Inflammatory process का शुरू होना


# SIGN & SYMPTOMS OF THE FRACTURE

  • फ्रैक्चर वाले भाग में सूजन (edema ) व दर्द होना। 
  • फ्रैक्चर वाले भाग का गर्म (warm) और लाल (redness) होना। 
  • Open फ्रैक्चर की स्थिति में रक्त स्त्राव (bleeding) होना। 
  • Tenderness (प्रभावित क्षेत्र को छूने पर दर्द महसूस होना)
  • Numbness (फ्रैक्चर वाले भाग का सुन्न होना)
  • फ्रैक्चर वाले अंग की कार्य करने की क्षमता में कमी। 
  • Crepitus (फ्रैक्चर वाले भाग में करकराहट की आवाज आना)

# MANAGEMENT OF THE FRACTURE


1. MEDICAL MANAGEMENT

इसमें Reduction, Immobilization, Maintanance & restoring function शामिल है। 

I. > REDUCTION (setting of "bone")

इसमें फ्रैक्चर हुई हड्डी के alignment को फिर से ठीक किया जाता है। इसमें टूटी हुई हड्डी के टुकड़ों को फिर से पहले जैसे क्रम में व्यवस्थित किया जाता है, ताकि healing की प्रक्रिया आसानी से हो सके।
इसके दो प्रकार है -

a. > Open reduction
  • इसमें सर्जरी (surdery) के द्वारा हड्डी के alignment को फिर से ठीक किया जाता है। 
  • इसमें external fixation और internal fixation डिवाइस का उपगोय करके alignment को फिर से ठीक किया जाता है।  
b. > Close reduction
  • इसमें स्किन को बिना काटे टूटी हुई हड्डी को सेट (alignment) किया जाता है। 
  • इसमें traction डिवाइस का उपगोय करके alignment को फिर से ठीक किया जाता है।       


II. > IMMOBILIZATION

फ्रैक्चर हुई हड्डी को सेट (alignment) करने के बाद उसे immobilize किया जाता है, ताकि टूटी हुई हड्डिया आपस में अच्छी तरह से जुडी रहे और अपने स्थान से हिले-डुले नहीं।

इसमें external fixation, internal fixation और traction डिवाइस का उपगोय करके फ्रैक्चर बोन को immobilize किया जाता है।

a. > Internal fixation
BONE FRACTURE
INTERNAL FIXATOR
  • Internal fixation एक surgical process है जिसका उपयोग टूटी हड्डियों को आंतरिक रूप से सेट और स्थिर करने के लिए किया जाता है। 
  • Internal fixator डिवाइस त्वचा के अंदर की तरफ लगाई जाती है।

b. > External fixation

  • इस process में टूटी हड्डियों को बाहरी रूप से सेट किया जा सकता है।  
  • यह उपकरण आमतौर पर बच्चों में उपयोग किया जाता है और जब फ्रैक्चर के ऊपर की त्वचा क्षतिग्रस्त हो जाती है।

    c. > Traction      
    Traction एक ऐसी डिवाइस है जिससे टूटी हुई हड्डी को एक तरफ खींचकर(pulling force) और दूसरी तरफ से विपरीत बल (counter traction force) लगाकर उसे सेट किया जाता है।
         इसके दो प्रकार है :
         
    1. > Skin traction - इसमें फ्रैक्चर के नीचे त्वचा पर स्प्लिंट्स(splints), पट्टियाँ(bandages) या चिपकने      वाली टेप(adhesive tape) लगाना शामिल है। eg.

    bone fracture

    2. >Skeletal traction - इसमें हड्डी में Pins, Wires और Screw आदि लगाना शामिल है।

    cervical tongs traction of bone fracture

    III. > MAINTANING AND RESTORING FUNCTIONS

    • इसमें फ्रैक्चर हुए अंग की कार्य क्षमता(strength) को वापस लाने की कोशिश की जाती है। 
    • इसमें नियमित exercise भी शामिल है जिससे फ्रैक्चर वाले अंग में रक्त प्रवाह(blood circulation) सही रहता है और मांसपेशियों(muscles) की कार्यक्षमता(strength) बढ़ती है। 
    • फ्रैक्चर वाले जगह पर यदि किसी तरह का दर्द या सूजन है तो वहा Cold sponging (बर्फ से सेंक) की जाती है। 
    • यदि किसी मरीज को किसी तरह की चिंता (anxiety), बेचैनी (discomfort) है तो उसे दूर किया जाता है।
    • साथ ही मरीज को दिनचर्या के कार्य(activity of daily living) करने के लिए प्रेरित(motivate) किया जाता है।  


    2. PHARMACOLOGICAL MANAGEMENT

    • NARCOTICS - यह दर्द को कम करती है और नींद लाती है, इसे हीलिंग(healing) के शुरूआती समय में मरीज को दिया जाता है। 
    • NSAIDs (Non Steroidal Anti Inflammatory Drugs) - इसे inflammation को कम करने के लिए उपयोग में लाया जाता है। 
    • ANTIBIOTICS - किसी प्रकार के संक्रमण(infection) से बचने के लिए। 
    • ANTICOAGULANT - DVT (Deep Vain Thrombosis) vain में रक्त के थक्के को जमने से रोकता है। *क्योकि फ्रैक्चर के समय vain भी damage होती है जिससे वहा रक्त का थक्का(blood clot) बन जाता है, ये थक्का vain में जाकर वहा blockage कर सकता है। अतः इस थक्के को तोड़ने के लिए anticoagulant दिया जाया है।  

    Ads middle content1

    Ads middle content2