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Dialysis: types, uses, procedure in Hindi

Dialysis: types, uses, procedure in Hindi

dialysis


डायलिसिस क्या है? - Dialysis in Hindi

  • किडनी शरीर से अपशिष्ट (Waste) और अतिरिक्त तरल (Excess fluid) पदार्थ को रक्त से निकालकर रक्त को फ़िल्टर करती हैं। फ़िल्टर होने से बने इन अपशिष्ट पदार्थो को मूत्राशय (Bladder) में भेजा जाता है। जहां ये यूरिन के रस्ते  बाहर निकल जाते है।  
  • अगर किसी कारण से किडनी अपना कार्य करना बंद कर देती है तो शरीर में फिल्टरेशन की प्रक्रिया को सही तरीके से चलने के लिए डायलिसिस प्रोसेस का सहारा लिया जाता है।
  • डायलिसिस (Dialysis) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे मशीन का उपयोग करके किडनी के सारे काम किये जाते है। जैसे - रक्त को फ़िल्टर करना, इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाये रखना आदि।
  • यह किसी भी उम्र के व्यक्ति में किया जा सकता है।  

    डायलिसिस क्यों किया जाता है - Dialysis use in Hindi

    जब किडनी सही तरीके से काम करती है तो वह शरीर में अतिरिक्त पानी, अपशिष्ट पदार्थो और अन्य अशुद्धियों को जमा होने से रोकती है। साथ ही किडनी शरीर के ब्लड प्रेशर और मिनरल्स (सोडियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, पोटाशियम)  का संतुलन (Regulation) बनाये रखती है।
    लेकिन जब किडनी किसी बीमारी या चोट की वजह से अपना काम करना बंद कर देती है तो डायलिसिस (Dialysis) की मदद से किडनी के सारे कार्य किये जाते है। डायलिसिस के बिना रक्त में अपशिष्ट पदार्थ (Waste materials - यूरिया) और मिनरल्स जमा होने लगेंगे।  इन अपशिष्ट पदार्थो के जमा होने से ये बाकी के दूसरे स्वस्थ अंगो को भी नुकसान पहुंचाने लगते है। 

    किडनी की समस्याओं को दूर करने के लिए डायलिसिस एक इलाज नहीं है यह एक सपोर्ट सिस्टम की तरह काम करता है।  


    डायलिसिस के प्रकार - Dialysis Types in Hindi 

    1. हेमोडायलिसिस - Hemodialysis

    हेमोडायलिसिस सबसे सामान्य प्रकार की डायलिसिस प्रक्रिया (Process) है। इस प्रक्रिया में एक हेमोडायलिजर का उपयोग करके रक्त (Blood) से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ (Excess fluid) को हटाया जाता है। इसमें रक्त को  शरीर के बाहर रखे हेमोडायलिजर मशीन से होकर गुजारा जाता है जहा उसे फ़िल्टर करके वापस शरीर में भेज दिया जाता है। 

    2. पेरिटोनियल डायलिसिस - Peritoneal dialysis

    इसमें पेट के पेरोटोनियल झिल्ली (Peritoneal membrane) में एक कैथेटर डाला जाता है। इस प्रक्रिया में कैथेटर की मदद से पेरिटोनियम में एक विशेष तरह का तरल (Fluid) डाला जाता है इस तरल को डायलेसेट (Dialysate) कहते है। डायलेसेट पेरिटोनियम में मौजूद रक्त से अपशिष्ट पदार्थो को सोख लेता है और फिर इसे बाहर निकाल दिया जाता है।

    पेरिटोनियल डायलिसिस के कई अलग-अलग प्रकार हैं : 
    • कंटीन्यूअस एंबुलेंस पेरिटोनियल डायलिसिस (Continuous ambulance peritoneal dialysis/CAPD) - इसे दिन में कई बार डायलेसेट तरल (Dialysate fluid) के साथ दोहराया जाता है। इसे रोगी के जागते समय किया जाता है और इसमें किसी भी मशीन की जरूरत नहीं पड़ती है। 
    • ऑटोमेटेड पेरिटोनियल डायलिसिस / कंटीन्यूअस साइकलिंग पेरिटोनियल डायलिसिस  (Automated peritoneal dialysis; APD / Continuous cycling peritoneal dialysis;CCPD) - इसमें डायलेसेट को मशीन के जरिये पेट में भेजा और निकाला जाता है। यह आमतौर पर रात में सोते  समय किया जाता हैं।  


    डायलिसिस कैसे किया जाता है - How to Dialysis Performed in Hindi

    हेमोडायलिसिस

    आवश्यक उपकरण - Needed Apparatus includes

    hemodialysis

    प्रक्रिया - Process
    • सबसे पहले बांह को निम्बिंग क्रीम या स्प्रे से सुन्न (Numb) किया जाता है।  
    • डायलिसिस की प्रक्रिया शुरू करने से पहले दो सुइयों को आपके बांह में बने ए-वी फिस्टुला (A-V Fistula) में लगाया जाता है। एवी फिस्टुला एक जोड़ (Joint) होता है जो बांह की धमनी (artery) और शिरा (vein) को आपस में सर्जरी द्वारा जोड़ कर बनाया जाता है।
    • धमनी (artery) और शिरा (vein) को एक साथ मिलाने से रक्त वाहिका (Blood vessels) बड़ी और मजबूत हो जाती है। इससे आपके रक्त को डायलिसिस मशीन में स्थानांतरित करना और फिर से वापस लाना आसान हो जाता है।
    • दोनों सुइयों के साथ लम्बी और पतली ट्यूब लगी होती है जो डायलिसिस मशीन से जुड़ी होती है।   
    • जो सुई आर्टरी में लगी होती है वो आर्टरी से ब्लड को डायलेज़र (डायलिसिस मशीन) में भेजती है। 
    • डायलेज़र में एक फ़िल्टर मेम्ब्रेन (झिल्ली) लगी होती है और यह मेम्ब्रेन डायलेसेट सोलूशन में डूबी हुई रहती है।  
    • आर्टरी से जो ब्लड डायलेज़र में आता है वो फ़िल्टर मेम्ब्रेन से फ़िल्टर हो जाता है जिससे ब्लड में से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त पानी डायलेसेट सोलूशन में आ जाता है। 
    • अब फ़िल्टर किये गए ब्लड को दूसरी सुई की मदद से वैन (Vein) में भेज दिया जाता है। 
    • उपयोग में आया हुआ डायलेसेट सोलूशन को पम्प की मदद से डायलेज़र से बाहर चला जाता है और नया डायलेसेट सोलूशन मशीन में आ जाता है।        

    पेरिटोनियल डायलिसिस

    पेरिटोनियल डायलिसिस के कई अलग-अलग प्रकार हैं, इसलिए हम इन सब के बारे में जानेंगे :

    1. कंटीन्यूअस एंबुलेंस पेरिटोनियल डायलिसिस (CAPD)

    आवश्यक उपकरण - Needed Apparatus includes

    peritoneal dialysis

    प्रक्रिया - Process
      • सबसे पहले नाभि (Belly button) के नीचे एक चीरा (Cut) लगाकर उसमे एक पतली सी ट्यूब (कैथेटर) को डाला जाता है। इस चीरे के घाव (Lesion) को भरने के लिए लगभग एक सप्ताह का समय लग जाता है। घाव के भरने तक आगे की कोई भी प्रक्रिया शुरू नहीं की जाती है। (पेट में चीरा लगाने का का उद्देश्य यह है की डायलेसेट सोलूशन को पेट के अंदर पंप किया जा सके) 
      • जब कैथेटर पेट से अच्छी तरह जुड़ जाता है और घाव (Lesion) भी भर जाता है तब आगे प्रक्रिया शुरू की जाती है। 
      • सबसे पहले डायलेसेट सोलूशन के बेग को पेट में लगे कैथेटर से जोड़ दिया जाता है। जिससे डायलेसेट सोलूशन धीरे-धीरे पेरिटोनियल कैविटी में प्रवाह (Flow) होने लगता है। जहां कुछ घंटो में सारा सोलूशन कैविटी में भर जाता है। 
      • जब सारा सोलूशन कैविटी में भर जाता है तो पेरिटोनियल झिल्ली के दूसरी तरफ प्रवाहित हो रहे रक्त से अपशिष्ट पदार्थ (Waste) और अतिरिक्त पानी (Excess water) को सोलूशन द्वारा सोख लिया जाता है।
      • अब कैविटी में भरे पुराने सोलूशन को ड्रेनेज ट्यूब की मदद से ड्रेनेज बेग में भर लिया जाता है।
      • प्रक्रिया पूरी होने के बाद सारी ट्यूब्स को सही से सील कर दिया जाता है।  
      • एक पूरे दिन में यह प्रक्रिया कम से कम चार बार की जाती है।
      • एक बार ट्रेनिंग बाद रोगी खुद इसे घर पर कर सकता है।  

      2. ऑटोमेटेड पेरिटोनियल डायलिसिस (APD)  

      आवश्यक उपकरण - Needed Apparatus includes

      peritoneal dialysis


      प्रक्रिया - Process
          • APD और CAPD दोनों प्रक्रियाएं एक जैसी है लेकिन APD में डायलेसेट सोलूशन को बदलने के लिए मशीन का उपयोग किया जाता है। आमतौर इसे रात में सोते समय किया जाता हैं।  
          • इसमें डायलेसेट सोलूशन के बेग को ट्यूब्स साथ जोड़ा जाता है और फिर इसे APD मशीन इनस्टॉल किया जाता है। 
          • बाकी सारी प्रक्रिया CAPD के सामान ही होती है। 
          • इस प्रक्रिया में लगभग 8 से 10 घंटे लग जाते है।  
           

          डायलिसिस से जुड़े जोखिम - Risk associated with Dialysis in Hindi


          हेमोडायलिसिस से होने वाले जोखिम - Risk associated with Hemodialysis

          • ब्लड प्रेशर का कम होना 
          • संक्रमण 
          • मांशपेशियो में ऐंठन 
          • हाइपरकैलमिया (रक्त में पोटैशियम की मात्रा का बढ़ना) 
          • सोने में परेशानी 
          • अनियमित रूप से दिल का धड़कना 
          • त्वचा में खुजली 
          • पेरिकार्डिटिस (दिल के आसपास की झिल्ली की सूजन)
          • चिंता 

          पेरिटोनियल डायलिसिस से होने वाले जोखिम - Risk associated with Peritoneal dialysis

          • पेरिटोनिटिस (पेरिटोनियम में होने वाला इंफ्लामेशन)
          • वजन बढ़ना 
          • पेट दर्द 
          • ब्लड शुगर का बढ़ना (डायलेसेट में मिले डेक्सट्रॉस के कारण) 

          डायलिसिस के बाद देखभाल - Dialysis aftercare in Hindi

          • डाइट का विशेष ख़याल रखना। रोगी को यह पता होना चाहिए की उसे कितनी मात्रा में खाना-पीना है। 
          • पानी पीने की मात्रा का भी ध्यान रखना होगा ताकि शरीर में अतिरिक्त पानी का जमाव ना हो। शरीर में अतिरिक्त पानी से रोगी का ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।  
          • खाने में नमक की मात्रा का भी ध्यान रखे। 
          • मांस-मछली और डेयरी उत्पादों का सेवन ना करे क्योंकि इनमे पोटेशियम और फॉस्फोरस जैसे मिनरल्स की मात्रा ज्यादा होती है। (किडनी की बिमारियों में इन मिनरल्स को इसलिए अपने भोजन में शामिल नहीं करना चाहिए क्योंकि ये यूरिन के साथ बाहर नहीं निकल पाते और रक्त में इनकी मात्रा बढ़ जाती है जो की हानिकारक होती है)

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