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Kidney Stone: types, causes, symptoms, treatment in Hindi

Kidney Stone: types, causes, symptoms, treatment in Hindi


किडनी स्टोन



किडनी स्टोन क्या है? - Kidney Stone in Hindi?

  • आमतौर पर किडनी का काम शरीर में अपशिष्ट पदार्थो (Waste products) को छानने का है लेकिन कभी-कभी मूत्र (Urine) में उपस्थित लवण और दुसरे मिनरल्स पदार्थ आपस में चिपक कर एक ठोस पत्थर का आकर ले लेते है जिसे किडनी का स्टोन (Kidney stones) कहा जाता है।
  • इस पथरी का आकर चीनी के दाने से लेकर गोल्फ की गेंद तक का हो सकता है। 
  • जब तक किडनी की पथरी का आकर बड़ा नहीं हो जाता तब तक इसका कोई पता नहीं चलता है लेकिन जब इसका आकर बड़ा (5mm से 10mm तक) हो जाता है तो यह मूत्र नलिका (Ureter) को अवरुद्ध (Blocked) कर देता है, साथ ही असहनीय दर्द भी होने लगता है। 
  • किडनी की पथरी को मेडिकल भाषा में किडनी की पथरी (Kidney Stone), रीनल कैलक्युलस (Renal Calculus), नेफ्रोलिथ (Nephrolith) भी कहा जाता है।   

    किडनी स्टोन के प्रकार - kidney Stone Types in Hindi    

    किडनी स्टोन (Kidney Stone) चार प्रकार के होते है :
    1. कैल्शियम स्टोन (Calcium Stone) - ज्यादातर लोगो में इसी प्रकार की पथरी पायी जाती है। ये कैल्शियम ऑक्सलेट, कैल्शियम फॉस्फेट या कैल्शियम मेलिएट से बनी है। 
    2. यूरिक एसिड स्टोन (Uric Acid Stone) - ज्यादातर पुरुषों में इसी तरह का स्टोन पाया जाता है। इस प्रकार की पथरी तब बनती है जब शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा ज्यादा हो जाती है। मधुमेह से ग्रसित, जिन्हे लम्बे समय से डायरिया (दस्त) हो और ज्यादा मांसाहारी प्रोटीनयुक्त भोजन (मांस-मछली) करने वाले लोगो में इसकी सम्भावना बढ़ जाती है। (मांसाहारी प्रोटीनयुक्त भोजन में उपस्थित प्यूरिन हमारे शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा को बढ़ाता है)
    3. स्ट्रूवाइट स्टोन (Struvite Stone) -  इस प्रकार की पथरी उन महिलाओ में ज्यादा होती है जिनमे मूत्र नलिका का संक्रमण (Urinary Tract Infection) होता है। ये पथरी कम समय में ही बड़ी हो सकती है जिससे आगे चलकर किडनी का इन्फेक्शन हो सकता है।   
    4. सिस्टीन स्टोन (Cystine Stone) - इस प्रकार का स्टोन बहुत ही कम लोगो में पाया जाता है। यह स्टोन  सिस्टिनूरिया (Cystinuria) नामक आनुवाशिंक बीमारी (Genetic disorder) से बनता है। यह आनुवाशिंक बीमारी सिस्टीन की अधिक मात्रा से पैदा होती है।   


    किडनी की पथरी के कारण - Causes & Risk factors of Kidney Stone in Hindi

    जोखिम कारक - Risk Factors 

    • आनुवंशिकता (Genetics)यदि आपके परिवार में पहले किसी को किडनी की पथरी है तो आपको पथरी होने की संभावना बढ़ जाती है।
    • निर्जलीकरण (Dehydration) - प्रत्येक दिन आवश्यकता से कम पानी पीने से किडनी की पथरी होने का खतरा बढ़ सकता है। जो लोग गर्म, शुष्क जलवायु (Dry Climate) जैसे इलाको में रहते हैं और बहुत पसीना बहाते हैं उन्हें दूसरों की तुलना में अधिक जोखिम हो सकता हैं।
    • आहार (Diet) - मांसाहारी प्रोटीन (Animal Protein), सोडियम (नमक) और चीनी की अधिकता वाला भोजन खाने से किडनी की पथरी होने का खतरा बढ़ सकता है। 
    • मोटापा (Obesity) - जिनके शरीर का वजन बहुत अधिक होता है उन्हें भी पथरी होने का खतरा बढ़ सकता है।
    • गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी (Gastric Bypass Surgery) - इससे पाचन बिगड़ सकता है जिससे कैल्शियम और दुसरे पदार्थो का अवशोषण बढ़ जाता है। शरीर में कैल्शियम की अधिक मात्रा पथरी का कारण बन सकती है।
    • मेडिकल स्थितियां (Medical conditions) - रीनल ट्यूब्युलर एसिडोसिस, सिस्टिनूरिया, हाइपरथाइरोडिजम और मूत्र नलिका का संक्रमण (Urinary Tract Infection) जैसी बीमारिया भी पथरी होने के खतरे को बढ़ा सकते है। 
    • दवाइयां (Medicines) - डाईयूरेटिक्स और ज्यादा कैल्शियम युक्त एंटासिड मूत्र में कैल्शियम की मात्रा को बढ़ा देते है साथ ही विटामन-ए और विटामिन-डी की अधिक मात्रा पथरी होने के खतरे को बढ़ा सकते है।
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    किडनी की पथरी के लक्षण - Sign & Symptoms of Kidney Stone in Hindi 

    किडनी में पथरी के लक्षण तब तक नहीं दिखते है जब तक स्टोन (पथरी) बड़ी होकर रूकावट पैदा करने के लायक नहीं हो जाये। जब पथरी बड़ी हो जाती है तो वह मूत्र नलिका (Ureter) को अवरुद्ध (Blocked) करने लगती है जिससे भयंकर दर्द होने लगता है साथ ही निम्न लक्षण भी उत्पन्न होते है :
    • पसलियों (Ribs) के नीचे और पीठ में तेज दर्द 
    • पेट के निचले हिस्से और जांघो (Groin) में दर्द
    • दर्द अचानक कभी ज्यादा और कभी कम होता रहता है 
    • पेशाब करते समय दर्द होना 
    अन्य लक्षण      
    • गुलाबी, लाल या भूरे रंग का मूत्र (Urine) आना    
    • मूत्र से दुर्गंध (foul-smelling urine) आना 
    • मूत्र में धुंधलापन (Cloudiness) दिखाई देना 
    • पेशाब का कम मात्रा में आना लेकिन थोड़े-थोड़े समय बाद आते रहना 
    • मतली और उल्टी (Nausea and Vomiting)
    • ठण्ड के साथ बुखार आना 
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    किडनी स्टोन का निदान/परिक्षण - Diagnosis of Renal Stone in Hindi

    • शारीरिक परिक्षण (History collection & Physical examination) -  किडनी स्टोन के निदान के लिए इसमें डॉक्टर या नर्स आपसे आपकी पिछली मेडिकल जानकारी के बारे में पूछते है। इससे बीमारी के संभावित कारणों (Possible reasons) व अन्य स्तिथियों का पता लगाने में मदद मिलती है।
    किडनी की पथरी का पता लगाने के लिए कुछ अन्य डायग्नोस्टिक टेस्ट (नैदानिक परिक्षण) भी किये जाते है :
    • रक्त परिक्षण (Blood Test) - इससे रक्त में कैल्शियम और यूरिक एसिड की मात्रा का पता लगाया जाता है। इससे डॉक्टर को दूसरी चिकत्सीय स्थितियों (Medical condition) का पता चल सकता है। 
    • मूत्र परिक्षण (Urine Test) - इसमें रोगी से मूत्र (Urine) के सैंपल लिए जाते है। इसमें पूरे 24 घंटो में रोगी द्वारा किये गए मूत्र से अलग-अलग सैंपल लिए जाते है। इस टेस्ट से यूरिन में उपस्थित पथरी बनाने वाले मिनरल्स और पथरी को बनने से रोकने वाले पदार्थो की मात्रा का पता लगाया जाता है। 
    • इमेजिंग टेस्ट (Imaging Test) - इसमें शरीर के अंदर की तस्वीरें निकली जाती है, जिससे पथरी का पता चल जाता है। इसमें एक्स-रे, सीटी स्कैन, अल्ट्रासॉउन्ड, इन्ट्रावीनस पाइलोग्राम (इसमें हाथ की नस से शरीर में डाई इंजेक्ट की जाती है और बाद में एक्स-रे की मदद से शरीर के अंदर की तस्वीरें ली जाती है) शामिल है। 
    • पारित पथरी का विश्लेषण (Analysis of passed stones) - इस टेस्ट में पथरी को देखने के लिए एक छलनी (strainer) के माध्यम से पेशाब करने के लिए कहा जा सकता है जिससे पथरी के प्रकार का पता लगाया जा सकता है।  


    किडनी की पथरी का उपचार - Renal Stone Treatment or Management in Hindi 

    दवा द्वारा उपचार - Pharmacological Management

      • डाईयूरेटिक्स 
      • एलोप्यूरिनोल (Allopurinol) - यूरिक एसिड स्टोन से होने वाले दर्द को कम करने के लिए
      • फॉस्फोरस सोलुशन (Phosphorus solution) - कैल्शियम स्टोन से होने वाले दर्द को कम करने के लिए
      • सोडियम बाईकार्बोनेट (Sodium bicarbonate) - मूत्र को कम एसिडिक बनाता है   
      • आइबूप्रोफेन (ibuprofen) -  दर्द कम करने के लिए 
      • टेमसुलोसिन (Tamsulosin) - यह एक प्रकार की अल्फा-ब्लॉकर ड्रग है जो मूत्रनलिका (Ureter) की मसल्स को रिलेक्स करता है जिससे पथरी यूरिन के रास्ते से आसानी से निकल सके। 

      बिना सर्जरी द्वारा उपचार - Non surgical Management 

      • लिथोट्रिप्सी (Lithotripsy) - Litho = पत्थर , tripsy = तोड़ना/पीसना एक्स्ट्राकोर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी (Extracorporeal Shock Wave Lithotripsy; ESWL) के द्वारा पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ो के तोड़ दिया जाता है जिससे पथरी के बारीक टुकड़े साथ बाहर आ जाते है। 

      सर्जरी द्वारा उपचार - Surgical Management 

      • यूरेटेरोस्कोपी (Ureteroscopy)इसमें एक ट्यूब जैसी डिवाइस के साथ कैमरा और सर्जिकल उपकरण लगे होते है। जिसे मूत्रमार्ग (Urethra) के माध्यम से मूत्रनलिका (Ureter) में वह तक पहुंचाया जाता है जहा पथरी होती है। बाद में सर्जिकल उपकरण की सहायता से उस पथरी बाहर निकाल लिया जाता है।
      • परक्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी (Percutaneous nephrolithotomy) - इसमें पीठ में एक छोटा सा चीरा लगाकर एक ट्यूब जैसी डिवाइस को शरीर के अंदर डालते है इसके सर्जिकल उपकरण भी लगे होते है जिसकी सहायता से पथरी को बाहर निकाल दिया जाता है। लेकिन यह तब किया जाता है जब :
                1. पथरी कोई संक्रमण कर सकती हो।  
                2. पथरी इतनी बड़ी हो की उसे यूरिन के रास्ते से बाहर नहीं निकाला जा सके।  
                3. पथरी के कारण हो रहे दर्द को कम ना किया जा सके।   



      किडनी की पथरी के बचाव के उपाय - Kidney Stone Prevention in Hindi 

      किडनी की पथरी के बचाव के उपाय निम्न है :
      • आवश्यकतानुसार कैल्शियम लेना - ज्यादातर लोगो में बनने वाली पथरी कैल्शियम ऑक्सलेट से बनी होती है। इसलिए कई लोग सोचते है की कैल्शियम कम खाना चाहिए। लेकिन वास्तव में कम कैल्शियम खाने से शरीर में ऑक्सलेट की मात्रा बढ़ जाती है जिससे पथरी का खतरा बढ़ सकता है। इसीलिए हर उम्र के हिसाब से आवश्यकतानुसार कैल्शियम खाना चाहिए। 
      • हाइड्रेटेड रहना - एक दिन में लगभग 8 गिलास पानी पिये जिससे लगभग 2 लीटर आ सके। इससे मूत्र ज्यादा समय तक एकत्रित नहीं रहेगा, जिससे मूत्र पथ (Urine Path) साफ़ होता रहता है। मौसमी और संतरे जैसे खट्टे पेय पदार्थो का सेवन भी लाभदायक है, इसमें उपस्थित साइट्रेट पथरी को बनने से रोकता है।
      • कम सोडियम खाये - ज्यादा नमक (सोडियम) खाने से मूत्र में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है क्योंकि ज्यादा सोडियम, कैल्शियम को मूत्र से वापस रक्त (Blood) में नहीं ला पाता है। जिससे मूत्र में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है और कैल्शियम स्टोन बनने का खतरा बढ़ जाता है।  
      • ऑक्सलेट युक्त खाद्य पदार्थ कम खाएं - कुछ किडनी की पथरी ऑक्सलेट से बनती है इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थो का कम सेवन करना चाहिए जिनमे ऑक्सलेट उपस्थित हो। पालक, मूंगफली, कॉफ़ी, सोया उत्पाद, शकरकंद (Sweet Potato) में ऑक्सलेट की मात्रा अधिक होती है। 
      • पशु से प्राप्त प्रोटीन कम सेवन करे - मांसाहारी प्रोटीनयुक्त भोजन (मुर्गा, गोस्त, अंडा) में उपस्थित प्यूरिन हमारे शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है जिससे यूरिक एसिड स्टोन (किडनी स्टोन का एक प्रकार) बनने संभावना बढ़ जाती है। 


           
                 

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