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Shock in Hindi: Causes, symptoms, diagnosis

Shock in Hindi: Causes, symptoms, diagnosis

shock in hindi


शॉक (Shock in Hindi) दो प्रकार का हो सकता है: शारीरिक (Physiological) और मानसिक (Psychological), आज हम शारीरिक शॉक के बारे में विस्तार से बात करेंगे। 

शॉक क्या है? - Shock in Hindi


शॉक एक घातक मेडिकल स्थिति है जिसमे हमारे शरीर महत्वपूर्ण अंगो (Vital organ) तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता है। रक्त की कमी के कारण इन अंगो की कोशिकाओं (Cells) को काम करने के लिए आवश्यक राशन (ऑक्सीजन और ग्लूकोज़) नहीं मिल पता है, जिससे प्रभावित होकर कोशिकाएं अपना काम सही से नहीं कर पाती है।
शरीर के कई अंग प्रभावित होकर क्षतिग्रस्त होने लगते है। इसी कारण से शॉक की स्थिति में तुरंत उपचार की आवश्यकता पड़ती है। 

शॉक के प्रकार - Types of shock


शॉक की स्थिति को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जो रक्त प्रवाह को प्रभावित करती है। ये चारो स्थितियां जानलेवा (Life-threatening) है। 
  • Cardiogenic shock : Cardio मतलब ह्रदय, Genic मतलब उत्पन्न होना अर्थात शॉक की यह अवस्था ह्रदय के क्षतिग्रस्त होने की वजह से उत्पन्न होती है। दिल के क्षतिग्रस्त  होने के कारण यह ब्लड पंप सही से नहीं कर पाता है। जिसके परिणामस्वरुप heart attack और congestive heart failure जैसी स्थितिया उत्पन्न हो सकती है। 
  • Hypovolemic shock : यह स्थिति किसी चोट के कारण शरीर से अधिक मात्रा में रक्त और तरल की हानि से उत्पन्न होती है 
  • Obstructive shock : शॉक की इस स्थिति में शरीर के उन अंगो तक रक्त नहीं पहुंच पाता है जहा आवश्यकता होती है। पल्मोनरी एम्बोलिस्म (Pulmonary embolism) की अवस्था में रक्त का प्रवाह रूक सकता है। 
  • Distributive shock : डिस्ट्रिब्यूटिव शॉक की स्थिति में सबसे छोटी रक्त वाहिकाओं (smellest blood vessels) में रक्त प्रवाह के असामान्य वितरण (distribution) से शरीर के ऊतकों और अंगों को रक्त की अपर्याप्त आपूर्ति होती है। यह स्थिति कम ब्लड प्रेशर के कारण पैदा हो सकती है। 
Distributive shock के भी कई प्रकार है जो निम्नलिखित है:
  1. Anaphylactic shock : यह एक गंभीर एलर्जिक रिएक्शन है जिसमे हमारा शरीर कुछ पदार्थो के प्रति एलर्जिक रिएक्शन दर्शाता है जो वास्तव में हानिकारक नहीं होते है। जैसे भोजन, दवाईयां आदि। 
  2. Septic shock : इसके ब्लड पोइजनिंग के नाम से भी जाना जाता है, यह किसी बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण हो सकता है। किसी बैक्टीरिया के रक्त प्रवाह (Blood stream) में प्रवेश कर अपने टोक्सिन पदार्थो से शरीर के उत्तक (Tissue) और अंगो (Organ) को गंभीर नुकसान पहुंचाया जाता है।
  3. Neurogenic shock : यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central nervous system) को क्षति होने से होता है, जिसमे Spinal cord की इंजरी आम है। केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को हानि पहुंचने से रक्त वाहिनियों का फैलाव (Dialation) हो जाता है और ब्लड प्रेशर कम हो जाता है, जिससे शरीर के सभी अंगो तक रक्त पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुँच पाता है।

शॉक के कारण - Causes of shock in hindi


ऐसे कई कारण है जो आपके रक्त प्रवाह हो प्रभावित कर सकते है। इनमे ये कारण हो सकते है:
  • एलर्जी की गंभीर प्रतिक्रिया - Severe allergic reaction
  • रक्त की हानि - Blood loss
  • हार्ट फेलियर - Heart failure (हार्ट के काम न करने से शरीर के अंगो तक रक्त और ग्लूकोज की सप्लाई नहीं हो पायेगी)
  • रक्त में संक्रमण - Blood infection
  • विषाक्त पदार्थ का सेवन - Poisoning
  • निर्जलीकरण - Dehydration (निर्जलीकरण की स्थिति में शरीर में तरल पदार्थ की कमी होती है, जिससे ब्लड प्रेशर कम हो जाता है जो hypovolamic shock की स्थिति में होता है)
  • जलना - Burns (त्वचा के जलने के तुरंत बाद उस स्थान से तरल प्लाज्मा बाहर आने लगता है, जिससे शरीर में तरल पदार्थ की कमी होती है, जिससे ब्लड प्रेशर कम हो जाता है जो hypovolamic shock की स्थिति में होता है)

शॉक के लक्षण - Sign and Symptoms of shock


यदि आप शॉक में जाते हैं, तो आप निम्न में से एक या अधिक अनुभव कर सकते हैं:
  • दिल की अनियमित धड़कन (Irregular heartbeat)
  • नब्ज का तेज, कमजोर या नहीं होना (Rapid, weak, or absent pulse)
  • तेज और गहरी श्वास (Rapid, shallow breathing)
  • चक्कर (vertigo)
  • आँख की पुतली का विस्तार (Dilated pupils)
  • सीने में दर्द (Chest pain)
  • जी मिचलना (Nausea)
  • भ्रम (Confusion)
  • मूत्र में कमी (Decreased urine)
  • प्यास और मुँह सूखना (Thirst and dry mouth)
  • रक्त शर्करा का कम होना (Low blood sugar)
  • बेहोशी (Loss of consciousness)

शॉक का निदान - Diagnosis of shock in hindi


  • शारीरिक परिक्षण (Physical examination) - इसमें डॉक्टर या नर्स आपसे आपकी पिछली मेडिकल जानकारी के बारे में पूछते है। इसी के साथ कम ब्लड प्रेशर, कमजोर पल्स, तेज धड़कन  जैसे लक्षणों की जाँच भी कर सकते है। 
एक बार जब शॉक का निदान कर लिया जाता हैं, तो डॉक्टर की पहली प्राथमिकता आपके शरीर के रक्त संचार (Blood circulation) को जल्दी से जल्दी बेहतर करने की होती है।  
एक बार आपकी स्थिति स्थिर (Stable) होने के बाद डॉक्टर आगे के निदानो की तरफ बढ़ सकते है। 
  • इमेजिंग टेस्ट (Imaging test) - डॉक्टर चोटों या आपके आंतरिक ऊतकों और अंगों को नुकसान की जांच करने के लिए एमआरआई (MRI), सीटी स्कैन (CT scan), एक्स रे (X ray) व अल्ट्रासॉउन्ड (Ultrasound) का सहारा ले सकते है। 
  • ब्लड टेस्ट (Blood test) - इससे रक्त की हानि (Blood loss), संक्रमण (Infection) का पता लगाया जाता है। 

शॉक का उपचार - Treatment of shock in hindi


शॉक की स्थिति में बेहोशी, सांस लेने में तकलीफ और कार्डियक अरेस्ट भी हो सकता है। यही किसी व्यक्ति को शॉक की स्थिति में तुरंत मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ती है। 

शॉक के लिए प्राथमिक उपचार (First aid treatment) 

यदि आपको कोई व्यक्ति शॉक  स्थिति में मिले तो तुरंत मेडिकल सहायता के लिए 911 पर कॉल करे। 
  1. यदि व्यक्ति बेहोश है तो जांच करे की उसकी साँसे चल रही है। 
  2. यदि साँसे नहीं चल रही है तो तुरंत CPR दे। 
यदि साँसे  है तो:
  1. उस व्यक्ति को पीठ के बल लेटाएं। 
  2. उसके पैरो को जमीन से ऊपर की तरफ उठाये (लगभग 12 इंच तक) इससे शरीर के आवश्यक अंगो तक ब्लड की सप्लाई बढ़ जाती है। 
  3. उस व्यक्ति की लगातार साँसे और धड़कन को चेक करते रहे। 
यदि आपको संदेह है कि व्यक्ति ने अपना सिर, गर्दन में चोट लगी है तो उसे हिलाने से बचे। यदि कही चोट लगी है तो वह फर्स्ट ऐड करे। 
यदि व्यक्ति को उल्टी हो तो उसके सर को साइड में घुमा दे। 

दवा द्वारा उपचार (Pharmacological treatment)

  • Epinephrine - Anaphylatic shock की स्थिति में 
  • Antibotics - संक्रमण से बचने के लिए 
Cardiogenic shock की स्थिति में हार्ट सर्जरी की जा सकती है। 

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