Menu

Cholecystitis: cause, symptoms, treatment and more in hindi

Cholecystitis: cause, symptoms, treatment and more in hindi


What is Cholecystitis in hindi?
कोलीसिस्टाइटिस क्या है?

  • Cholecystitis (कोलीसिस्टाइटिस) का अर्थ पित्ताशय (Gallbladder) में होने वाली प्रदाह (Inflammation) है। शरीर के जिस भाग में प्रदाह होती है वहा तापमान में वृद्धि, सूजन, दर्द और लालिमा जैसे लक्षण देखने को मिलते है। 
    gallbladder
  • कोलीसिस्टाइटिस की समस्या तब शुरू होती है जब पित्ताशय में पथरी (Gallstones) बनने से पित्त की नलिका (Bile duct) बंद हो जाती है। धीरे-धीरे पित्तरस (Bile juice/ Bile) पित्ताशय (Gallbladder) में जमा होने लगता है और दूसरी समस्याएं भी होने लगती है, जिससे पित्ताशय के अंदर का बढ़ने लगता है। इस समस्या के पित्ताशय में प्रदाह (Inflammation) व इन्फेक्शन होने लगता है। 

  • Cholecystitis (कोलीसिस्टाइटिस) का सही समय पर इलाज ना किया जाये तो इससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। शुरआती समय में कुछ एंटीबायोटिक से इसका इलाज किया जा सकता है लेकिन गंभीर मामलो में सर्जरी करके पित्ताशय को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।  

    DEFINITION OF CHOLECYSTITIS (कोलीसिस्टाइटिस की परिभाषा)

    पित्ताशय में प्रदाह होना; Inflammation of gallbladder



    TYPES OF CHOLECYSTITIS (कोलीसिस्टाइटिस के प्रकार)

    कोलीसिस्टाइटिस के दो प्रकार है:
    1. ACUTE CHOLECYSTITIS (एक्यूट कोलीसिस्टाइटिस) - इसमें लक्षण शुरूआती समय में जल्दी ही विकसित हो जाते है। 
    एक्यूट कोलीसिस्टाइटिस के होने के कारणों को 2 मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है: 
    • Calculous cholecystitis (कैलक्युलस कोलीसिस्टाइटिस) - इसमें पित्ताशय नलिका (Bile duct) में रूकावट आने के कारण पित्ताशय में इन्फ्लामेसन होने लगता है। यह रूकावट Bile duct में पथरी (Gallstone) के फंसने से आती है। यह सबसे सामान्य प्रकार का पित्ताशय का इन्फ्लामेसन (Inflammation) है। इससे कोई भी गंभीर स्तिथि पैदा नहीं होती है।
    • Acalculous cholecystitis (अकैलक्युलस कोलीसिस्टाइटिस) - इसमें किसी प्रकार की गंभीर बीमारी, इंफेक्शन या पित्ताशय को क्षति पहुंचने से पित्ताशय (Gallbladder) में इन्फ्लामेसन (Inflammation) होने लगता है। यह सबसे गंभीर प्रकार का पित्ताशय का इन्फ्लामेसन (Inflammation) है। 

    2. CHRONIC CHOLECYSTITIS (क्रोनिक कोलीसिस्टाइटिस) - इसमें लक्षण शुरआती समय में धीरे-धीरे विकसित होते है। 
    इसमें ऊपरी पेट में दाहिनी तरफ में थोड़ी-थोड़ी देर में दर्द के अटैक आते रहते है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पथरी (Gallstone) समय-समय पर Bile duct को अवरुद्ध करती रहती है। 



    CAUSE & RISK FACTORS OF CHOLECYSTITIS (कोलीसिस्टाइटिस के कारण व जोखिम कारक)

    पित्ताशय के इन्फ्लामेसन (कोलीसिस्टाइटिस) का सबसे मुख्य कारण पथरी (Gallstones) की वजह से Bile duct का अवरुद्ध (Block) होना है। लेकिन 

    CAUSES (कारण)

    पित्ताशय के इन्फ्लामेसन के कुछ और कारण भी है:
    • ट्यूमर के कारण बाइल डक्ट का बंद होना - लिवर या अग्नाशय (Pancrease) में किसी प्रकार के ट्यूमर होने से पित्त नलिका (Bile duct) बंद हो जाती है। 
    • पित्ताशय में खून की सप्लाई कम होना - यदि रोगी को डायबिटीज है और उसके पित्ताशय को पर्याप्त खून नहीं मिल पा रहा है तो रोगी के पित्ताशय में इन्फ्लामेसन (कोलीसिस्टाइटिस) हो सकता है। 
    • पित्ताशय में संक्रमण  - पित्ताशय में किसी भी प्रकार के बैक्टीरियल संक्रमण से पित्ताशय का इन्फ्लामेसन हो सकता है क्योंकि बैक्टीरिया पित्तरस (Bile) के बाहर निकलने वाले मार्ग (Path) को ब्लॉक कर देते है। 


    RISK FACTORS (जोखिम कारक)

    कुछ ऐसी समस्याएं भी है जो पित्ताशय के इन्फ्लामेसन का रिस्क बढ़ा सकती है:
    • मोटापा (Obesity)
    • उम्र का अधिक होना (Higher age; more than 60 years)
    • गर्भावस्था (Pregnancy)
    • आपका एक महिला होना (Being a female) 
    • डायबिटीज (Diabetes)


    SIGN & SYMPTOMS OF CHOLECYSTITIS (कोलीसिस्टाइटिस के लक्षण)

    ऊपरी पेट के दाहिनी तरफ तेज दर्द होना कोलीसिस्टाइटिस का मुख्य लक्षण है। यह दर्द धीरे-धीरे फ़ैल कर दाएं (Right) कंधे और पीठ तक महसूस होने लगता है। यह दर्द सामान्य पेट दर्द से अलग होता है क्योंकि यह दर्द लगातार महसूस होता रहता है, लगातार कई घंटो तक भी ठीक नहीं होता। 

    पित्ताशय इन्फ्लामेसन (कोलीसिस्टाइटिस) के कुछ अन्य लक्षण भी है:
    • ऊपरी पेट के दाहिनी तरफ टच करने पर दर्द महसूस होना (Tenderness)
    • मितली या उल्टी महसूस होना (Nausea or Vomiting)
    • बुखार आना (Fever)
    • पेट का फूलना और सूजन (Abdominal bloating) 
    • अधिक पसीना आना (Sweating)
    • भूख कम या नहीं लगना (Little or no appetite)
    खाना खाने के बाद, विशेष रूप से ज्यादा वसा (Fat) युक्त भोजन करने के बाद लक्षण महसूस होने लगते है। 



    ASSESSMENT/ DIAGNOSIS OF CHOLECYSTITIS (कोलीसिस्टाइटिस के परीक्षण व निदान)

    • History collection & Physical examination (शारीरिक परिक्षण) -  इसमें डॉक्टर या नर्स आपसे आपकी पिछली मेडिकल जानकारी के बारे में पूछते है। इससे इस बीमारी के संभावित कारणों (Possible reasons) व अन्य स्तिथियों का पता लगाने में मदद मिलती है। डॉक्टर पेट को छूकर सूजन या टेंडरनेस (छूने पर दर्द होना) का पता लगाते है। 
    शरीर की अंदर से जांच करने के लिए कुछ अन्य डायग्नोस्टिक टेस्ट (नैदानिक परिक्षण) भी किये जाते है :
    • Ultrasound (अल्ट्रासाउंड) इसमें ध्वनि तरंगो के माध्यम से शरीर के अंदर के हिस्सों की तस्वीरें ली जाती है।
    • Hepatobiliary Iminodiacetic Acid Scan; HIDA (हिपेटोबिलरी इमिनोडाईएसिटिक एसिड स्कैन) - इसका दूसरा नाम कोलेस्किंटिग्राफी (Cholescintigraphy) है। इसकी स्कैन की मदद से लिवर, पित्ताशय (Gallbladder), पित्त नलिका (Bile duct) और छोटी आंत की तस्वीरें ली जाती है।
    • Blood test (खून जांच) - खून जांच में White blood cells (WBC) की संख्या ज्यादा आती है जो की किसी प्रकार के इंफेक्शन की तरफ इशारा करता है। साथ ही खून में बिलीरुबिन की मात्रा भी ज्यादा हो जाती है।



     MANAGEMENT/ TREATMENT OF CHOLECYSTITIS (कोलीसिस्टाइटिस का उपचार)

      1. MEDICAL MANAGEMENT (मेडिकल उपचार) :

      • पित्ताशय इन्फ्लामेसन (कोलीसिस्टाइटिस) से पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल में एडमिट करा दिया जाता है।
      • इस दौरान रोगी को कुछ समय तक कठोर (Solid) या तरल (Liquid) भोजन करने से मना किया जाता है। क्योंकि पित्ताशय भी हमारे पाचन तंत्र (Digestive system) का एक हिस्सा है, इस तरह के भोजन का सेवन नहीं करने पर पित्ताशय को आराम मिलता है। 
      • रोगी को तरल भोजन नसों के द्वारा (Intravenously) दिया जाता है। 
      • कोलीसिस्टाइटिस के कारण पेट में हो रहे दर्द को कम करने के लिए डॉक्टर कुछ दर्द निवारक दवाएं (Pain killer medicine) व इंफेक्शन को रोकने के लिए एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) दवाएं देते है। 
      • कुछ अन्य दवाएं दी जाती है जो पित्ताशय में होने वाली पथरी को गलाने का काम करती है जैसे - अर्सोडायोल (Ursodiol)

      2. NON SURGICAL MANAGEMENT (बिना सर्जरी के उपचार) :

      • Extracorporeal Shock Wave Lithotripsy; ESWL (एक्स्ट्राकोर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी) यह एक प्रकार की डिवाइस है जिसकी मदद से शॉक वेव के द्वारा पथरी (Gallstones) को टुकड़ो में तोड़ दिया जाता है। 
        Extracorporeal Shock Wave Lithotripsy

      3. SURGICAL MANAGEMENT (सर्जरी के द्वारा उपचार) :

      एक्यूट कैलक्युलस कोलीसिस्टाइटिस के केस में सर्जरी करने की जरूरत पड़ती है क्योंकि इस दौरान इन्फ्लामेसन के फैलने की दर काफी तेज होती है। 
      • Laproscopic cholecystectomy (लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी) इसमें एक ट्यूब जैसी डिवाइस के साथ कैमरा और सर्जिकल उपकरण लगे होते है, जिसे पेट में छोटा सा चीरा (Cut) लगाकर शरीर के अंदर भेजा जाता है और सर्जरी के द्वारा Gallbladder को हटा दिया जाता है। 
      • Open cholecystectomy (ओपन कोलेसिस्टेक्टोमी) - इसमें पेट पर बड़ा चीरा लगा कर Gallbladder को निकाल दिया जाता है। 
      पित्ताशय (Gallbladder) को हटाने से शरीर पर कोई असर नहीं पड़ता, शरीर पहले की ही तरह काम करता रहता है। पित्ताशय के बिना भी हम जीवित रह सकते है। पित्ताशय निकाल देने पर पित्त रस (Bile) लीवर से सीधा छोटी आंत (small intestine) में बहने लगता है।  

        

      Ads middle content1

      Ads middle content2

      cholecystitis